Hippocrates

Hippocrates Inspirational Quotes To Motivate You



 अगर आप खुद अपने चिकित्सक नहीं हैं तो आप मूर्ख हैं।
 अगर खाने या व्यायाम में कोई कमी होगी तो शरीर बीमार हो जाएगा।
 इंसान की डाइट का हर एक तत्व उसके शरीर पर असर डालता है और किसी न किसी तरह उसे चेंज करता है और इन्ही बदलावों पर उसका पूरा जीवन निर्भर करता है।
 कभी-कभी क्योर करो, अक्सर ट्रीट करो, हेमशा कम्फर्ट दो।
 कला लम्बी है, ज़िन्दगी छोटी है।
 चरम बीमारियों के लिए चरम उपचार बहुत ही उपयुक्त है।
 ज़रुरत से ज्यादा हर चीज प्रकृति के खिलाफ है।
 जहाँ कहीं भी चिकित्सा की कला से प्रेम किया जाता है, वहां मानवता के लिए भी प्रेम होता है।
 ज़िन्दगी इतनी छोटी है, कारीगरी सीखना इतना लम्बा।
 जिस तरह से भोजन की वजह से क्रोनिक डिजीज होती है, उसी तरह से ये सबसे अच्छा क्योर भी हो सकता है।
 दरअसल, दो चीजें हैं, ज्ञान और मत; पहले से ज्ञान आता है, दूसरे से अज्ञान।
 दवाइयों को केमिस्ट के पॉट में छोड़ दें अगर आप मरीज को खाने से ठीक कर सकते हैं।
 दो चीजों की आदत डालिए मदद करने की; या कम से कम कोई नुक्सान ना पहुंचाने की।
 प्रकृति खुद में सबसे अच्छी चिकित्सक है।
 प्रार्थना सचमुच अच्छी है, लेकिन भगवान् को पुकारते समय इंसान को खुद अपना हाथ बढ़ाना चाहिए।
 फिजिशियन इलाज करता है, लेकिन प्रकृति ठीक करती है।
 बिना ज्योतिष के ज्ञान के एक फिजिशियन को खुद को फिजिशियन कहने का अधिकार नहीं है।
 बीमारी हमारे ऊपर बस ऐसे ही कहीं से नहीं टपक पड़ती। वे रोजाना प्रकृति के खिलाफ किये गए छोटे-छोटे पापों से उपजती है। जब पर्याप्त पाप इकठ्ठा हो जाता है, अचानक से बीमारी सामने आ जाती है।
 बुद्धिमान व्यक्ति को स्वास्थय को सबसे बड़ा मानवीय आशीर्वाद मानना चाहिए। भोजन को अपनी दवा बनने दीजिये।
 मरीजों की गलतियों पर भी ध्यान रखिये, जो अक्सर उन्हें बतायी गयी चीजें लेने के बारे में झूठ बुलवाता है।
 यदि कोई अपनी अच्छी सेहत चाहता है, तो पहले उसे खुद से पूछना चाहिए कि क्या वो अपनी बीमारी के कारणों को हटाने के लिए तैयार है। केवल तभी उसकी मदद करना संभव है।
 ये जानना कहीं ज्यादा ज़रूरी है कि किस तरह के व्यक्ति को बीमारी है बजाये इसके कि व्यक्ति को किस तरह की बीमारी है।
 शरीर का हर अंग जिसका कोई फंक्शन है, अगर संयमित ढंग से प्रयोग होता है और उससे उतना श्रम किया जाता है जिसका वो आदि है तो वो स्वस्थ होता है, अच्छे से विकसित होता है और उसकी उम्र धीमे-धीमे बढती है, लेकिन अगर उसक प्रयोग न हो तो वो रोग का भागी हो जाता है, अविकसित रह जाता है और उसकी उम्र तेजी से बढ़ती है।
 सत्य जानने के लिए हमें प्रकृति की तरफ ही देखना चाहिए, बीमारी और स्वास्थय के दौरान शरीर को ध्यान से देखना चाहिए।
 सबसे बड़ा गुण जो एक भाषा में हो सकता वो है स्पष्टता, और अनजाने शब्दों के प्रयोग से अधिक इसे कुछ और विचलित नहीं करता है।
 सारी बीमारियाँ पेट से शुरू होती हैं।
 स्वस्थ रहने का रास्ता है रोज एरोमेटिक बाथ और सेंटेड मसाज लेना।
 स्वस्थ होना समय का मामला है , लेकिन कभी-कभी ये अवसर की भी बात है।
 हमारे अन्दर की प्राकृतिक ताकतें बीमारियों की सच्ची आरोग्यसाधक होती हैं।
 हर किसी के अन्दर एक डॉक्टर होता है, हमें बस उसे उसके काम में मदद करनी होती है।

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